जबलपुर (नवनीत दुबे )बीते दिनों संस्कारधानी स्थित मानस भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में जमकर हंगामा हुआ ,ये बात सर्वविदित है लेकिन मुद्दे की बात यह है के कार्यक्रम आयोजको द्वारा जिस तरह संविधान की किताब फाड़े जाने का आरोप लगाकर अनर्गल प्रलाप किया गया और हिन्दू संगठन के दो से तीन युवकों पर भीड़ ने हमला कर मोब्लिंचिंग की वह बात प्रश्नचिन्ह लगा रही है ?साथ ही इस कृत्य में कॉंग्रेस के एक कद्दावर ओर स्थानीय दिग्गज जनप्रतिनिधि का आपा खोकर पुलिस विभाग और हिन्दू संगठनों को खरी खोटी सुनानां सियासती दृष्टि से लाभप्रद हो सकता है पर पूरे मामले को जाने बिना संविधान की प्रति फाड़े जाने का आरोप लगाकर आवेश में आना सोचनीय विषय है

जिसका संस्कारधानी के जनमानस पर विपरीत प्रभाव दर्शा रहा है,ऐसे में ये कहना अतिश्योक्ति नही होगा के कुछ ओछी मानसिकता के अनुयायी जो खुद को हिन्दू समाज से अलग मानकर अंबेडकर की आड़ में सनातन की पावन गरिमा को धूमिल कर रहे है साथ ही हिन्दू आराधो का उपहास बना रहे है जो निकृष्ट ओर कलंकित कार्य है जो ये दर्शाता है के आरक्षण की मलाई खाकर ये हिंदुओ के विरोध में भांति भांति के मंसूबे तैयार कर सनातन समाज को खंड खंड करने भरसक प्रयास कर रहे है ?मानस भवन में आयोजित हुए कार्यक्रम में जो परिस्थिति उत्पन्न हुई उसकी मुख्य वजह कार्यक्रम स्थल में हिन्दू ग्रंथो के नाम पर फूहड़ ओर अश्लील भाषा शैली वाले साहित्य नाम परिवर्तित करके विक्रय हेतु स्टाल लगाया गया था ,ऐसे में प्रश्न ये उठता है के आयोजक मंडल की मंशा नुरूप ये स्टाल लगाया गया था और हिन्दू आराध्यों के प्रति कुंठित ,जहरीली मानसिकता का प्रदर्शन किया जा रहा था ?
जिसका विरोध विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों द्वारा किया जा रहा था ,जिससे बौखलाए सनातन विरोधियों ने भीड़ एकत्र कर परिषद के कार्यकर्ताओं की धुनाई की ओर गली गलौच कर अपनी शिक्षा,संस्कार का परिचय दिया ,सारे घटनाक्रम में एक पहलू विचारणीय है के आयोजित कार्यक्रम में कॉंग्रेस के विधायक पूर्व केबिनेट मंत्री लखन घनघोरिया भी उपस्थित थे और उनकी दृष्टि से ये बात कैसे चूक गए के आयोजन स्थल पर बिक रहे साहित्य हिन्दू देवी देवताओं के लिए अभद्र ओर अपमानजनक भाषा शैली से प्रयुक्त थे ?और हंगामे की मुख्य वजह हिन्दू देवी देवताओं के अपमान था ,न के संविधान की प्रति फाड़ने जैसा कोई कृत्य हुआ था,जबकि इस बात के पप्रमाण सार्वजनिक हो चुके है जिसमे हिन्दू विरोधी मानसिकता का प्रदर्शन हो रहा था ?चिंतनीय विषय है के आखिर किसकी शह पर सनातन की गरिमा को खंडित करने का दुस्साहस हो रहा है ?और अंबेडकर के नाम पर जाति पंथ की आग को भड़काने का प्रयास कौंन कर रहा है ?
