जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। पाटन ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) डॉ. आदर्श विश्नोई पर सरकारी वैक्सीन के कथित दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि बच्चियों और युवतियों के लिए सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई वैक्सीन को निजी अस्पतालों में बेच दिया गया, जिससे करीब 25 से 30 लाख रुपये के घोटाले की आशंका जताई जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू कर दी है।सरकारी वैक्सीन निजी अस्पतालों में बेचने का आरोप समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिन आशीष मिश्रा ने आरोप लगाया है कि पाटन ब्लॉक में सरकारी टीकाकरण कार्यक्रम के तहत आई वैक्सीन का गलत इस्तेमाल किया गया। उनका दावा है कि बच्चियों और महिलाओं के लिए निर्धारित वैक्सीन को सरकारी अस्पतालों में लगाने के बजाय निजी अस्पतालों तक पहुंचाया गया। शिकायत में इस पूरे मामले को करोड़ों की स्वास्थ्य योजनाओं में सेंध लगाने वाला गंभीर भ्रष्टाचार बताया गया है।फर्जी नियुक्तियों और पैसों के लेन-देन के भी आरोप शिकायत केवल वैक्सीन तक सीमित नहीं है। आरोप लगाया गया है कि आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती में भी बड़े स्तर पर अनियमितताएं की गईं। योग्य उम्मीदवारों को नजरअंदाज कर कथित रूप से पैसों के लेन-देन के आधार पर नियुक्तियां की गईं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इससे सरकारी भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।बिना अनुमति विदेश यात्रा और बेनामी संपत्ति का भी आरोप डॉ. आदर्श विश्नोई पर यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने विभागीय नियमों की अनदेखी करते हुए बिना आवश्यक अनुमति के विदेश यात्राएं कीं। इसके अलावा उनके खिलाफ आय से अधिक और बेनामी संपत्ति अर्जित करने के आरोप भी लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं ने इन सभी बिंदुओं की विस्तृत जांच कराने की मांग की है।
CMHO ने बनाई तीन सदस्यीय जांच समिति मामले के सामने आने के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. नवीन कोठारी ने तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर दी है। समिति में वर्तमान जिला टीकाकरण अधिकारी (DIO) डॉ. विनोद गुप्ता, पूर्व DIO एवं स्टोर प्रभारी डॉ. दहिया तथा DHO-1 डॉ. विनीता पॉल को शामिल किया गया है। विभाग का कहना है कि समिति के सदस्यों को वैक्सीनेशन और प्रशासनिक कार्यों का लंबा अनुभव है।7 दिन में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश स्वास्थ्य विभाग ने जांच समिति को पूरे मामले की विस्तृत जांच कर सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल विभाग ने जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से बचने की बात कही है।शिकायतकर्ताओं की चेतावन FIR नहीं हुई तो जाएंगे कोर्ट शिकायतकर्ताओं ने साफ कहा है कि यदि जांच निष्पक्ष नहीं हुई और दोषी पाए जाने पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई, तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। उनका कहना है कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों को कानून के दायरे में लाना जरूरी है।जांच रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजर फिलहाल पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग की जांच शुरू हो चुकी है और अब सभी की नजर सात दिनों में आने वाली जांच रिपोर्ट पर टिकी है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल विभागीय कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आपराधिक जांच और कानूनी कार्रवाई का भी आधार बन सकता है। वहीं, जांच पूरी होने तक आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
