जबलपुर (नवनीत दुबे) संस्कारधानी अब स्मार्ट सिटी कही जाने लगी है ,पर दुर्भाग्य के स्मार्टनेस के नाम पर बदनुमा बदहाल व्यवस्थाय ही दृष्टिगत हो रही है,हालांकि वो बात अलग है के नगर सत्ता के विकासवीर जिम्मेदार फ्लेक्सो में चहुओर नजर आ जाते है ,ऐसा हो भी क्यो न कुरूपता का दंश झेल रही स्मार्ट सिटी को पुरस्कार जो मिला है,खेर मुद्दे की बात पर आते है शहर विकास का जोर शोर से ढोल पीटने वाले जिम्मेदार माननीय जहाँ एक ओर अपने मु मिया मिट्ठू बन खुद की पीठ थपथपा रहे है ,तो वही प्रमुख चौराहों व व्यस्तम मार्गो में व्याप्त अव्यवस्थाय नगर सत्ता के ढोल की पोल खोल रही है,

विजय नगर के अह्निसा चौक में भी आज कुछ ऐसा ही दृश्य देखने मे आया जहाँ सिग्नल वाले चौराहे पर मवेशियों के झुंड सपरिवार भ्रमण करता दिखा ,आखिर ऐसा हो भी क्यो न स्मार्ट सिटी का तमगा मिलने के बाद ये भी तो गौरवांवित है और खुलेआम घूम घूम कर स्मार्ट सिटी के विकास का आनंद ले रहे है,संभवतः इन मवेशियों को भी एक बात समझ आ चुकी है के जिम्मेदार विभाग के अधिकारी से अधीनस्थ तक सरकारी कुर्सी में मौज का लुत्फ ले रहे है और कर्तव्य निष्ठा के नाम पर शासकीय वाहनों में घूम कर आवारा मवेशियों को पकड़ने का दिखावा कर खाना पूर्ति कर लेते है ?खेर नगर पालिका निगम की कार्य प्रणाली से जबलपुर का जनमानस भलीभांति परिचित है, रही जिम्मेदार विभाग के अधिकारियों की तो” जब सैया भय कोतवाल तो फिर डर कहें का” की पराकाष्ठा सर्वोच्च बन चुकी है ?दुर्भाग्य ही कहेंगे शहर के प्रमुख चौराहों व कालोनियों में बदहाली चीख चीख कर अपनी वेदना व्यक्त कर रही है ,लेकिन नगर सत्ता के जिम्मेदार व संबंधित विभागों के जिम्मेदार भर कटोरा मलाई खाने में व्यस्त है ?
