माखन चोर की नगरी में मदिरा का व्यापार……सनातनी युवाओ पर झूठा प्रकरण किसकी शह पर

News Desk
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जबलपुर (नवनीत दुबे)बीते दिनों धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की हिन्दू एकता पदयात्रा जो दिल्ली से वृंदावन तक थी उस यात्रा के बीच न जाने कितने ही दोगलो ने षड्यंत्र ओर साजिशों का मसौदा तैयार कर पदयात्रा को हिंसक आग में झोंकने का प्रयास किया लेकिन “होइए वही जो राम रची राखा” सो हुआ भी वही निर्विघ्न लाखो की संख्या में सनातनी हिन्दू धीरेंद्र शास्त्री के साथ हिन्दू राष्ट्र की गर्जना के साथ चले और ये पावन कार्य श्रीकृष्ण की नगरी वृंदावन में सउल्लास सम्पन्न हुआ,ये बात तो सर्वविदित है किंतु इसी बीच कुछ विघ्नसंतोषी दोगले हिंदुओ को ये बात हजम नही हुई और वे भांति भांति के आक्षेप लगाकर धीरेंद्र की आड़ में सनातन की सर्वोच्च प्रतिष्ठा को धूमिल करने हरसंभव प्रयास कर रहे है ?तो वही धीरेंद्र कृष्ण के एक वक्तव्य जिसमे वृंदावन ब्रज में संचालित शराब दुकान को बंद करने मदिरा विक्रय प्रतिबंधित करने के आव्हान से सियासी भूचाल आ गया और वहा के शराब ठेकेदारों के हाथ पांव फूल गए,गोरक्षा दल के दक्ष चौधरी,अक्कू पंडित,अभिषेक ठाकुर ने सच्चे सनातनी होने का दम्भ भरते हुए वृंदावन स्थित शराब दुकान को बंद करवा दिया जिससे बवाल मच गया और शोशल मीडिया में ये खबर आग के जैसी फेल गई, दुर्भाग्य ही कहेंगे के पावन तीर्थ नगरी में खुलेआम शराब दुकान संचालित होने सत्ता धारियों की करनी ओर कथनी पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है ?अब बात आती है शराब ठेकेदार उसके कर्मचारियों व गोरक्षा दल के इन सनातनी युवाओ की तो धन की गर्मी और अधिकारियों की भरपूर सेवा के फलस्वरूप तीन सनातनी युवाओ पर गंभीर धाराओं के तहत प्रकरण बना दिया गया जिसमें सम्बंधित थाना क्षेत्र के पुलिस अधिकारी द्वारा शराब ठेकेदार के प्रति वफादारी दिखते है 5 लाख की रकम वसूली की मांग,सार्वजनिक क्षेत्र में गुंडा गर्दी,तोड़फोड़ इत्यादि कई धाराओं के तहत मामला कायम कर ठेकेदार के प्रति समर्पण का भाव प्रदर्शत कर दिया,हालांकि तीनो सनातनी गोरक्षा सेवको को माननीय न्यायालय से जमानत मिल गई,लेकिन मुद्दे की बात ये है के जहाँ एक ओर हिन्दू एकता,हिन्दू राष्ट्र, की गर्जना हो रही है तो वही आखिर ये कौंन लकड़बघहे है जो हिन्दू होते हुए हिंदुओ की जड़ काट रहे है और सनातन समाज को जातिवर्ग की आग में झोंक रहे है ?कभी अंबेडकर के नाम पर, कभी दलित के नाम पर,तो कभी जातिगत भेद के नाम पर हिंसा की आग लगने का प्रयास कर रहे है ?सोचनीय पहलू है के इनके इस कृत्य के पीछे की मंशा कय्या है और ये किन आकाओं के इशारे पर सनातन विरोधी घृणित मानसिकता के बीज बो रहे है,तो वही माखनचोर की नगरी में मदिरा के व्यपार का संचालन किस नीति के तहत हो रहा है और सनातन की आवाज बुलंद करने वालो पर कानून का चाबुक किसके इशारे पर चल रहा है ?तो वही कुछ जातिविशेष के लोगो द्वारा खुलेआम सनातन हिन्दू समाज को अपशब्द बोले जा रहे है,ओर आराध्य देवी देवताओं का मजाक बनाया जा रहा है,जिसका शोशल मीडिया पर जमकर प्रचार प्रसार हो रहा है ,ऐसे विघ्न संतोषी कुंठित मानसिकता के जाहिलो पर कानून का चाबुक क्यो नही चल पाता ?

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