जो सरकार चाह रही थी वहीं हुआ गिरती सरकार को बचा लिया सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश से

News Desk
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जबलपुर देशभर में कोरोना वायरस की तरह तेजी से फैल रहे यूजीसी जन आंदोलन के खिलाफ केंद्र सरकार व राज्य सरकारों की नींद हराम हो गई थी केंद्र सरकार अपने ही थोपे नियमों के बीच इस बुरी तरह उलझ गई थी यहां तक कि भाजपा संगठन से जुड़े नेताओं के इस्तीफे आने के साथ ही साथ यह एक्ट मोदी शाह के गले की फांस बन चुका था यदि सुप्रीम कोर्ट से स्टे न होता तो देश को जातीय दंगों की आग से झुलसने किसी भी कीमत में बचाएं रखना बामुश्किल था, आज सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने) विनियम, 2026 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की। कोर्ट में इन विनियमों को सामान्य वर्गों के विरुद्ध भेदभावपूर्ण होने के आधार पर चुनौती दी गई है। ऐसे में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगी दी। अब नए आदेश तक 2012 के नियम ही लागू रहेंगे।केंद्र को नोटिस जारी, 19 मार्च को अगली सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि नए नियम अस्पष्ट हैं। कोर्ट के कहा कि नए यूजीसी नियमों का दुरुपयोग हो सकता है। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया और यूजीसी के नए नियमों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। अब इस मामले पर अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।इधर, सुप्रीम कोर्ट की ओर से यूजीसी रेगुलेशन 2026 पर रोक लगाने पर याचिकाकर्ता के वकील एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने कहा, ‘आज सुप्रीम कोर्ट ने हमारी रिट याचिका पर सुनवाई की, जिसमें हाल ही में बनाए गए त्रष्ट रेगुलेशन को चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने त्रष्ट रेगुलेशन पर रोक लगा दी है और उन्हें अभी लागू नहीं किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अगले आदेश तक त्रष्ट रेगुलेशन 2012 ही लागू रहेंगे। मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।केंद्र और यूजीसी से जवाब मांगा मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने इन रिट याचिकाओं की सुनवाई की। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि हमें जातिविहीन समाज की ओर बढऩा चाहिए और हम पीछे जा रहे हैं। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि क्या हम उल्टी दिशा में जा रहे। जिन्हें सुरक्षा चाहिए, उनके लिए व्यवस्था होनी चाहिए। इसी के साथ उन्होंने केंद्र और यूजीसी से जवाब मांगा है। साथ ही कहा है कि एक विशेष कमेटी भी बनाई जा सकती है। इसी के साथ नए नियमों की भाषा को स्पष्ट करने के लिए विशेषज्ञों की जरूरत पर भी जोर दिया।यूजीसी के नए नियमों से देशभर में आक्रोश दरअसल, यूजीसी रेगुलेशन, 2026 को 23 जनवरी, 2026 को नोटिफाई किया गया था। जिसे लेकर पूरे देश में आक्रोश फैल गया। जिसके बाद इसे कई याचिकाकर्ताओं ने मनमाना, भेदभावपूर्ण और संविधान के साथ-साथ यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन एक्ट, 1956 का उल्लंघन बताते हुए चुनौती दी। यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन के खिलाफ याचिकाएं मृत्युंजय तिवारी, एडवोकेट विनीत जिंदल और राहुल दीवान ने दायर की हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि ये नियम सामान्य वर्गों भेदभाव को बढ़ावा देते हैं ।नलिन कांत बाजपेयी पत्रकार

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