राजशाही जीवन जी रहे सियासतदारों की अहम से भरी मृत संवेदना……..
जबलपुर (नवनीत दुबे) ये सियासती रसूख में राजशाही जीवन व्यतीत कर रहे माननीय आमजन के प्रति कितने संवेदना रखते है इसका प्रत्यक्ष उदाहरण इंदौर में घटित हुई घटना जिसमे दूषित पानी पीने से लगभग एक दर्जन से ज्यादा लोगो की मौत हो चुकी है,
ओर हजार के लगभग लोग सत्ताधारियों ओर प्रशाशन की नकारा व्यवस्था का शिकार बन अस्पताल में जीवन के लिए संघर्ष कर रहे है,सर्वविदित है के जिम्मेदार विभाग के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय है जो मोहन यादव सरकार में नगरीय प्रशाशन मंत्री के दायित्व का निर्वहन कर रहे है,अब ऐसे में प्रश्न ये उठता है के मंत्री जी अपने विभाग के अधीन विभागों के प्रति कितने सजग और सचेत है ?या फिर सिर्फ जनमानस से समय समय पर टैक्स वसूली के लिए ही अधिकारियों को दिशा निर्देश देते है ,जबकि लचर ओर भ्रष्ट व्यवस्था जो नगर पालिका निगमो की पहचान बन चुकी है उसके प्रति आंखे मूंदे है,वैसे विजयवर्गीय जी से एक पत्रकार ने जब इस संबंध में प्रश्न किया तो खुद को कटघरे में खड़ा देख नगरीय प्रशाशन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय आग बबूला हो गए और जिस भाषा शैली का प्रयोग किया वो सवालिया निशान है ?क्या इतने अहम विभाग के सिरमौर मंत्री जी की गुंडई भरे लहजे की अभिव्यक्ति पद की गरिमा पर शोभा देती है ?खेर सियासती भगवान है भैया भाजपाई सत्ताधारी कब किस पर वक्रदृष्टि डाल दे और व्यक्ति गुमनामी की धुंध में गुम हो जाय इसलिए जादा न बोला जाए ?मुद्दे की बात पर आते है मोहन यादव की भाजपा सरकार जब से प्रदेश में कार्यभार सम्हाली है तब से प्रदेश की जनता किसी न किसी रूप में त्रस्त है प्रत्येक शासकीय विभाग अपनी मनमानी युक्त कार्यप्रणाली का प्रदर्शन कर जनमानस को हासिये में रखे हुए है ? सूत्रों की माने तो हर आदेश अब भोपाल से ही पारित होता है और जैसा मुखिया जी बोलेंगे अधीनस्थ वैसा ही पालन करेंगे ?
तो वही भाजपा के इतने वरिष्ठ नेता कैलाश विजय वर्गीय को उनके कद से नीचे की श्रेणी में पदासीन करके माननीय की मनोस्थिति पर आलाकमान ने पहले ही चोट कर दी थी अब ऐसे में इंदौर में घटित हुई मानवीय संवेदना को तार तार करने वाली ये दूषित पानी से मौत का मामला दिन ब दिन तूल पकड़ता जा रहा है ,इन परिस्थितियों में नगरीय प्रशाशन की पोल खोल कर रख दी है ?सीधी सी बात है जो माननीय बिसलरी ओर आर ओ का सुद्ध जल पीते हो और जिन्होंने कभी नाले नालियों के नीचे से निकली सरकारी पेयजल की पाइप लाइन का पानी ही न पिया हो वो भला कैसे संमझ सकते है के आमजन शासकीय विभागों की भर्राशाही से भरी कार्यप्रणाली के फलस्वरूप यातना युक्त जीवन जी रहा है,चर्चा तो ये भी है के इंदौर में हुई इस घटना की गूंज दिल्ली दरबार मे जमकर हो रही है जिसकी परिणति स्वरूप मध्यप्रदेश में बहुत बड़ा सियासी बदलाव होने वाला है और जातिवाद की राजनीति से आलाकमान की कुदृष्टि प्रदेश के सियासी आकाओं पर लग चुकी है और कभी भी राजशाही सुख भोग रहे पदासीन माननीय कुर्सी से उतर सकते है ?
