क्या हमारे सौरमंडल में हम अकेले हैं. यह सवाल सदियों से इंसान को परेशान कर रहा है. अब बृहस्पति के बर्फीले चांद यूरोपा ने एक नई उम्मीद जगाई है. वैज्ञानिकों को वहां एक अजीबोगरीब और डरावना ‘मकड़ी जैसा निशान’ मिला है. इसे देखकर ऐसा लगता है जैसे किसी विशाल जीव ने वहां खरोंच मारी हो या कोई विशाल मकड़ी वहां रेंग रही हो. नासा के गैलिलियो स्पेसक्राफ्ट ने इसे दशकों पहले देखा था. लेकिन अब जाकर इसका राज खुला है. यह निशान सिर्फ एक लकीर नहीं है. बल्कि यह इस बात का सबूत हो सकता है कि यूरोपा की बर्फ के नीचे पानी का समुद्र हिलोरें ले रहा है. और जहां पानी है, वहां जीवन की संभावना भी हो सकती है. वैज्ञानिकों ने इसे ‘डम्हैन अल्ला’ नाम दिया है. जिसका मतलब है ‘दीवार का राक्षस’ या ‘स्पाइडर’. आइए जानते हैं इस रहस्यमय मकड़ी की पूरी कहानी और इसके पीछे छिपे विज्ञान को.
बृहस्पति के चांद पर रेंग रही है ‘राक्षसी मकड़ी’? नासा की इन तस्वीरों ने उड़ाई वैज्ञानिकों की नींद
आखिर क्या है यह ‘दीवार का राक्षस’ और नासा को यह कब दिखा?
यह कहानी 1990 के दशक के अंत में शुरू हुई थी. नासा का गैलिलियो स्पेसक्राफ्ट बृहस्पति और उसके चंद्रमाओं का चक्कर लगा रहा था. तभी उसने यूरोपा के ‘मनन्नान क्रेटर’ (Manannán crater) के पास कुछ अजीब देखा. तस्वीरों में एक स्टारबर्स्ट यानी तारे के फटने जैसा पैटर्न दिखाई दिया.
आयरिश भाषा में इसे ‘डम्हैन अल्ला’ (Damhán Alla) नाम दिया गया है. जिसका अर्थ होता है मकड़ी या ‘दीवार का राक्षस’. ट्रिनिटी कॉलेज डबलिन के वैज्ञानिकों ने अब जाकर इस पहेली को सुलझाया है. उन्होंने अपनी नई स्टडी में बताया है कि यह डरावना निशान कैसे बना होगा. यह निशान किसी उल्कापिंड की टक्कर से नहीं बल्कि यूरोपा के अंदरूनी हिस्से में हो रही हलचल से बना है.
