जबलपुर (नवनीत दुबे ) बीते दिनों सिवनी हवाला कांड के करोड़ो रूपये की आपसी बंदरबाट के आरोप में पुलिस अधिकारी पूजा पांडेय समेत कई खाकीधारी जेल की सलाको में बंद है ,ये तो सर्वविदित है लेकिंन हवाला कांड की राशि मे हुए गबन में नित दिन नए नए नामो का खुलासा होना और ऐसे ऐसे पुलिस अधिकारियों के चेहरे सामने आना अचंभित करने वाला है ,सीधी सी बात है हवाला की आग की लपटें उन सभी पुलिस अधिकारियों को अपने आगोश में ले रही है जो खुद को ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ दर्शाते नही थकते थे ?मुद्दे की बात पर आते है सिवनी पुलिस अधीक्षक से लेकर अधीनस्थ अधिकारी तक शक के घेरे में है और परत दर परत सबके ईमानदार चेहरों पर पर्दे उठते जा रहे है ,दुर्भाग्य कहे या विडंबना के जो खाकी धारी वर्दी का रौब दिखाकर कानून व्यवस्था ,ओर अपराधियो में भय व्याप्त रखते थे आज वही रौब धारी खाकी धारक विभागीय वक्रदृष्टि का शिकार होकर मु छुपाकर लोगो ओर मीडिया से बचते बचाते कारागृह की ओर जा रहे है,सूत्रों की माने तो हवाला कांड में अग्रिम पंक्ति की मुख्य सूत्रधार पूजा पांडेय को माना जा रहा था ,लेकिन पूजा के पीछे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के दिशा निर्देश पर ही हवाला की राशि मे गबन की बात सामने आ रही है ,बात निकली है तो दूर तलक जायेगी की तर्ज पर सिवनी हवाला कांड में करोड़ो की राशि मे पुलिसिया गबन से जहाँ एक ओर खाकी की अस्मिता तार तार हुई है तो वही संदेह के दायरे में गुप्त रूप से जिन पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच हो रही है वो सभी रक्तचाप की दवाई दिन में 4 बार खा रहे है और सियासती आकाओं के दरवाजे पर दंडवत हो रहे है ,लेकिन पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की इस मामले में निष्पक्ष जांच के चलते इन महोदयों की दाल नही गल पा रही है,ओर एस आई टी की परत दर परत खोलती कार्यवाही संदेह के घेरे में आय सिवनी के अन्य पुलिस अधिकारी चाहे पुलिस कप्तान हो या अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सबकी रातों की नींद हराम हो चुकी है 
,हाल ही में डी एस पी पंकज मिश्र की हुई गिरफ्तारी से मानो भूचाल आ गया हो,विभागीय सूत्रों की माने तो अभी पूरे हवाला कांड के मास्टर माइंड का नाम सामने आने वाला है जिससे हड़कम्प की स्थिति निर्मित होगी ,साहब की सम्मान प्रतिष्ठा तो दागदार होगी ही साथ ही अपने ही विभाग के लोगो के सामने थू थू होगी सो अलग ?चर्चा तो ये भी है साहब ऊपर से पुरजोर सेटिंग में लगे है के विशेष जांच दल की कार्यवाही पर अवरोध लग जाय ,लेकिन साहब लोगो की ये मंशा पूर्ण होती नही दिख रही “होइए वही जो राम रची राखा” खेर धनतृष्णा की भूख के चलते खाकी को चंद लोगो ने दागदार तो कर ही दिया और विभाग के ईमानदार कर्तव्यनिष्ठ उन जैसे लोभियों के चक्कर मे खुद को लज्जित महसूस कर रहे है क्योकि अस्मिता खाकी की जो है, अंतत कलम यही कहकर विराम दे रही कि धनतृष्णा की ऐसी भूख के सलाखों के पीछे पहुच गए जो बड़ी शान से खाखी धारण कर शासकीय वाहन में रुतबे से निकलते थे आज उनकी शान ओर रुतबा दो कौड़ी का होकर रह गया ?
