जबलपुर (नवनीत दुबे) बीते दिनों संस्कारधानी में कांग्रेस द्वारा केंद्र की भाजपा सरकार व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों के विरोध में प्रदर्शन किया गया जिसमें बड़ी संख्या में कोंग्रेसी उपस्थित थे,ये तो सर्वविदित है लेकिन मुद्दे की बात ये है के इस प्रदर्शन के दौरान कुछ ऐसा परिदृश्य दृष्टिगत हुआ जिसने सोचने विवश कर दिया के खाकी के गिरेबाँ पर हाथ डालने का पावर सियासती रसूखदारों के पास है जो खाकी की गरिमा व मान को अपनी जेब मे रखते है इसी की परिणीति कुछ यूं देखने मिली जहाँ कोतवाली थाना प्रभारी मानस द्विवेदी ओर कॉंग्रेस नेता आलोक मिश्रा की बीच तीखी झड़प हुई और मिश्रा जी ने वरिष्ठ कॉंग्रेस नेता होने के रसूख के चलते अधीनस्थ स्टाफ के सामने ही द्विवेदी जी की कालर पकड़ ली और जबलपुरिया भाषा में खरी खोटी सुना दी ?तो वही अपने गिरेबाँ के स्वाभिमान की उड़ रही धज्जियां द्विवेदी जी को आक्रोशित कर गई पर बेचारे सिर्फ नियम कानून की दुहाई देते हुए अपने इस अपमान के घूंट के मन मारकर पी गए ,इस पूरे घटनाक्रम के साक्षी आमजन इस तमाशे का लुत्फ उठाने के साथ ही बड़े चटकारे लगाकर यही कह रहे थे नेता जी ने कॉलर पकड़ ली तो थाना प्रभारी कसमसाकर रह गए और नियम कानून का डंडा उल्टा पड़ा रहा ,वही कोई आमजन ऊंची आवाज में बोल देता तो महोदय ओर उनका खाकीधारी स्टाफ पिछवाड़े को लाल कर देता और विभिन्न धाराओं के तहत ऐसा प्रकरण बनाते के आमजन की पीढियां कानून के डंडे को देखकर सहम जाती !
