जबलपुर (नवनीत दुबे) नगर पालिका निगम जबलपुर की भर्राशाही से भरी कार्यप्रणाली जनजाहिर है,चाहे निगम के सत्ताधारी हो या यहाँ के विभागीय अधिकारी सभी के सभी सिर्फ निज लाभ को प्राथमिकता देकर शहर हित का ढोल पीटते नजर आते है?
मुद्दे की बात पर आते है अतिक्रमण के मकड़जाल से कुरूप हो चुका शहर अपनी अस्मिता बचाने की चीख चीख कर दुहाई दे रहा है लेकिन इसे सुनने वाला कोई नही ऐसा इसलिए उलेखित किया गया क्योकि बीते दिनों जिस तरह से जिम्मेदार विभाग के अधिकारी अपने अधीनस्थ कर्मियों के साथ अतिक्रमण मुक्त कराने निकले थे उसे देखकर यही प्रतीत हो रहा था के अब संस्कारधानी का स्वरूप सुंदर व व्यवस्थित हो जायेगा पर हाय री विडंबना अतिक्रमण विरोधी अभियान भृष्ट व्यवस्था और सियासती गुलामी की भेंट चढ़ गया, एक ओर जहां ताबड़ तोड़ अतिक्रमण हटाया जा रहे थे तो ही दूसरी ओर निगम के ही कर्मचारी अतिक्रमण करियो के रहनुमा बन उन्हें इस कार्यवाही को महज औपचारिकता बता रहे थे ,ओर एक दो दिन बाद पुनः यथास्थान पर काबिज हो जाने की बोलते जा रहे थे,हुआ भी कुछ ऐसा ही समाचार पत्रों ,सोसल मीडिया ,न्यूज़ चैनलों में निगम की सजग और ईमानदार निष्पक्ष कार्यवाही की खबर फोटो और अधिकारियों के नाम छपे बस फिर गया जहाँ अधिकारी अपने अमले ओर संसाधनों के साथ छाती फुलाकर कार्यवाही की वाहवाही लूट रहे थे वहां दूसरे दिन अतिक्रमण कारी फिर स्थापित हो गए साथ ही दो चार अतिक्रमण करी ओर बढ़ गए ,हास्यदपड ही कहेंगे के शासकीय वाहनों का इस कार्यवाही में जिस तरह उपयोग किया जा रहा है ओर शासकीय कागजो में धन राशि के खर्च को लाखों में दर्शाने का टारगेट पूरा करने की मंशा महोदयों की करनी ओर कथनी को साफ साफ दर्शा रही है
