जबलपुर (नवनीत दुबे ) सर्वविदित है की घरेलू गैस को लेकर त्राहिमाम की स्थिति बनी हुई है और सुबह से ही आमजन लंबी कतारों में खड़े होकर घर का चूल्हा जल जाय बच्चों के भोजन की व्यवस्था हो जाय, इसीजुगाड़ में चिलचिलाती धूप में गैस प्राप्ति के लिए जद्दोजहद कर रहा है, तो वही सत्ताधारी बड़ी बेशर्मी के साथ सत्ता मद का ढोल पीटकर बोल रहे है गैस की कोई कमी नही है सिर्फ सत्ता विरोधी भ्रामक प्रचार कर सत्ता को बदनाम करने षड्यंत्र रच रहे है ,अब ऐसे में प्रश्न ये उठता है कि घरेलू गैस सिलेंडर के लिए लंबी कतारें ओर गैस एजेंसी संचालको का उपभोक्ताओं से मुह छुपाना आखिर किस बात को दर्शा रहा है ? ऐसे पशोपेश की स्थिति में यही प्रदर्शत हो रहा के गैस की किल्लत का दिखावा किया जा रहा है और सत्ताधीशों के सरंक्षण में खुली कालाबाजारी को छूट दी जा रही है ?एक बात गौरतलब है कि सियासत से जुड़े अदना कार्यकर्ता से दिग्गज आकाओं तक को सहजता से गैस घर पहुच रही है और इनके रसूख के चलते न तो इन्हें लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है
और न ही एजेंसी संचालक इनसे मुह छुपा रहे है बल्कि सियासती रसूख के फलस्वरूप सियासत से जुड़े लोगों की तन मन से पूर्ण सेवा की जा रही है ,दुर्भाग्य ही कहेंगे के घरेलू गैस संकट से त्राहिमाम की स्थिति निर्मित है लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि को जनमानस की इस विकट परिस्थिति से कोई सरोकार नही है,क्योकि सत्ता सुख के चलते इन्हें ऐशोआराम के साथ वीआईपी जीवन मे लिप्त रहने की आदत पड़ चुकी है,इसी की परिणीति है के इस विकराल समस्या के प्रति आंख बंद,कान में रुई लगा ली है,ऐसा हो भी क्यो न क्योकि केंद्र में बैठे आका से लेकर प्रदेश में बैठे मुखिया तक जनता है दिखावटी हितेषी बन भरपूर गैस स्टॉक की बात कर रहे है फिर ऐसे में अपने आकाओं की बात को सत्य दर्शाना ही इनका दायित्व है ?मुद्दे की बात ये है कि चाहे भाजपा हो या कांग्रेस इन राजनीतिक दलों के सफेद कुरताधारियो को सिर्फ जनसंवेदना,जनसुविधा का राजनीतिक ढोल पीटने की आदत है जबकि वास्तविकता यही है इन सभी को जनमानस को भावनात्मक मूर्ख बनाकर सत्ता के सिंहासन पर विराजमान होने आतुरता ही प्रमुख उद्देश्य है ?इस बात से भी इंकार नही किया जा सकता के यदि अभी विधानसभा,लोकसभा,पार्षद,के चुनाव होते तो सत्ताधारी दल और सत्ताविमुख राजनीतिक दल के कुर्ता धारी जनमानस को लुभाने सहज उपलब्ध होते और घर घर गैस पहुँचवाने का कार्य करते पर दुर्भाग्य ही है के अभी कोई चुनाव नही है ,जिसके फलस्वरूप हर जनप्रतिनिधि जनमानस के प्रति निष्क्रिय है,ओर निज लाभ के प्रति पूर्ण सक्रियता से कर्तव्य निष्ठ है,
