जबलपुर (नवनीत दुबे )इस समय संस्कारधानी में आर,आर,एस की जोड़ी शहर को स्वस्थ और सौन्दर्यवान स्वरूप देने की कवायद में जुड़ी है,आप सोच रहे होंगे आर ,आर,एस से आशय कय्या है तो स्पष्ट है जिला कलेक्टर राघवेंद्र सिंह, निगमायुकत रामप्रकाश अहिरवार,पुलिस कप्तान ,संपत उपाध्याय, ये तीनो ही अधिकारी पूरी कर्तव्य निष्ठा के साथ संस्कारधानी के बदहाल स्वरूप की सौंदर्य वान बनाने दिन रात मैदानी स्तर पर कार्य कर रहे है,
इसी तारतम्य में बीते दिन बड़ा फुहारा क्षेत्र का दौरा किया और यहाँ व्याप्त अनियमितताओं पर अंकुश लगाने अधीनस्थों को दिशा निर्देशित किया,पर हाय री विडंबना साहब लोगो ने सियासतदरों की दुखती रग पर हाथ रख दिया संभवतः उन्हें इस बात का अंदाजा नही होगा सियासती दाव पेंच का मुख्य आधार केंद्र बड़ा फुहारा ही है और यह स्थापित व्यापारिक प्रतिष्ठान किसी न किसी सियासत दार के रिश्तेदारों के है या इनके कृपा पात्रों के तभी तो धड़ल्ले से 60 फीट की सड़क को महज 20 फीट में तब्दील कर दिया यहाँ के व्यापारियों ने ओर मुख्य मार्ग पर अपनी व्यापार सामग्री फैला कर प्रशाशन को आंख दिखा रहे है ? सर्वविदित है के यहाँ के व्यापारिक प्रतिष्ठान मालिक ही फुटपाथ पर व्यापार करने वालो को अपने रसूख के दम पर काबिज किये हुए है और नित दिन के अनुसार 500 से 1000 रुपये इन लोगो से वसूलते है ?क्योकि इन व्यापारियों को भली भांति पता है के इनके राजनीतिक आका जिम्मेदार विभाग को अपनी बपौती समझते है और कोई अधिकारी यहाँ फैले अतिक्रमण को साफ करने का साहस नही जुटा पाता हालांकि ये बात भी सत्य है कि अगर कार्यवाही होती भी है
तो नेताजी लोगो की मंशा अनुसार महज रस्म अदायगी होती है ,ओर इससे पूर्व भी कई बार अतिक्रमण विरोधी कार्यवाही यहाँ हो चुकी है लेकिन ढाक के तीन पात दूसरे दिन फिर अतिक्रमण जंस के तस काबिज हो गए और व्यापारी अपने पुरनें ढर्रे पर बीच सड़क पर कब्जा कर व्यापार करने लगते है ,तो वही रद्दी चौकी ओर मिलोनीगंज में भी हालत बद से बदतर है इस क्षेत्र में ज्यादातर मुस्लिम वर्ग के लोग व्यापार संचालित करते है और नियम कानून को ताक पर रखकर अतिक्रमण का मकड़जाल फैला कर अराजक स्थिति निर्मित किये हुए है,
कबाड़ से लेकर वाहन रिपेरिंग,सोफा अलमारी,फर्नीचर इत्यादि के व्यापार के साथ ही मास मछली का व्यपार भी प्रमुख मार्ग पर कब्जा कर किया जाता है ,लेकिन मजाल है जिम्मेदार विभाग इस क्षेत्र में अपनी वक्रदृष्टि करने का साहस जुटा पाय ओर अगर कभी आधिकारिक दवाब के चलते बुलडोजर अतिक्रमण विरोधी कार्यवाही करने भी जाता है तो सियासती रसूखदार इनके हमदर्द बनकर इसके बचाव में दो दो हाथ करने आगे आ जाते है ,अब प्रश्न ये उठता है कि शहर को व्यवस्थित बनाने की दिशा में अग्रणी तीनो वरिष्ठ अधिकारी पूरे कर्तव्यनिष्ठ जज्बे के साथ जमीनी स्तर पर आ कर नीति निर्देशो का कानूनी चाबुक लेकर चल रहे है जिससे अराजक ययतायत व्यवस्था, प्रमुख मार्गो पर अवैध अतिक्रमण,व्यपारिक प्रतिष्ठानों के संचालको की सड़क पर कब्जा कर व्यपार संचालित करने की दबंगई पर पूर्ण अंकुश लग सके ,तो ही दूसरी और वोटबैंक की राजनीति और सियासती रसूख संस्कारधानी में व्याप्त अनियमितताओं ओर कुरूपता को बढ़ावा दे रहा है ?अब देखना ये है के इन वरिष्ठ अधिकारियों की सुव्यवस्थित नीति पर कितना कार्य होता है या फिर महोदयो पर माननीयों का सियासी रुतबा भारी पड़ता है ?
